Wednesday, January 25, 2012

द्वंध

आज एक शंखनाद सा गूंजा हृदय में
और हम
छटपटा के रह गए.
क्या हुआ और क्या होना चाहिए था
इन विचारो में
हम कुछ भी न सोच पाए 
और आखिरकार 
हम फिर से उसी 
दोराहे पर ही पहुँच पाए
जहाँ से हमने सफ़र
अपना शुरू किया था कभी.......... 

3 comments:

  1. सुंदर अभिव्यक्ति..

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  3. duvidha ki sthiti me aksar yahi hota hai. sunder prastuti.

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