Wednesday, November 29, 2017

चाहती हूँ

अधूरे खाबों का अधूरापन पूरा करना चाहती हूँ।
मैं अपने आप की तन्हाइयों से लड़ना चाहती हूँ।
जो पहले कभी नहीं किया, वो करना चाहती हूँ।
मैं अपने आप से बहुत प्यार करना चाहती हूँ।

खाली खाली क्यों हर पल लगता है मुझे,
अधूरा सा क्यों हर ख्वाब लगता है मुझे,
कुछ मीठी बातों से, कुछ मीठी यादों से
मैं इस खालीपन को भर देना चाहती हूँ।
एक खूबसूरत से अंजाम के साथ
इन ख्वाबो को पूरा कर देना चाहती हूँ।

पल पल इस डर से उबरना चाहती हूँ ,
मैं खुद से बहुत प्यार करना चाहती हूँ।

जो पहले कभी नहीं किया वो करना चाहती हूँ।
मैं अपने आप से बहुत प्यार करना चाहती हूँ।








Monday, May 29, 2017

वाहनचालक

वाहनचालक जिन्हे हम अक्सर अंग्रेजी में ही पुकारते है........  ड्राइवर्स  है ना। जो कि हमें शहर के एक छोर से दूसरे छोर तक ले जाते है। जो पान/गुटका खाते है , गलियां देते है, चिल्लाते है, जिनकी नीयत अच्छी नहीं होती, जिनके साथ गाड़ी में बैठे तो ध्यान दे , गाड़ी का नंबर नोट करे, अपनों को मैसेज करे। क्या जाने वो कैसे हो... ऐसा सा ही एक व्यक्तित्व आता है सामने जब ड्राईवर शब्द सुनते है।

उस दिन भी मैं रोज़ की तरह टैक्सी में बैठी और अपनी मंजिल की और चल पड़ी। बैग खोला तो देखा ईयरफोन घर भूल आयी थी। यूँ तो अक्सर कोई न कोई सवारी साथ होती है, शेयर टैक्सी में लेकिन उस दिन मैं अकेली थी। यूँ ही मैंने ड्राइवर से पूछा "काम कैसा चल रहा है भैया (सुना था की टैक्सी का बिज़नेस बहुत ही फायदे में चल रहा था)" ड्राइवर ने जवाब दिया की "बस दाल रोटी चल जाती है ", मैंने और कुरेदा तो पता चला की कभी कभी तो गैस का खर्चा भी नहीं निकल पता। टैक्सी कम्पनीज़ ने नियम कानून बदल दिए और अब टैक्सी के काम में ज्यादा कुछ बचता नहीं। हम जैसी सवारियां भी उन पर चिल्लाते है और कंपनियां भी। टैक्सी के मालिक इनसे १४-१४ घंटे गाड़ी चलवाते है क्योंकि टारगेट पूरा नहीं होगा तो इनकी तनख्वा पूरी नहीं मिलेगी और ऐसी ही न जाने कितनी बातें हुई उस छोटे से सफर में। बातों बातों में ये भी पता चला की जिन ड्राइवर भाई के साथ मैं सफर कर रही थी उन्होंने ऍम ए किया हुआ था और अपने ज़माने में वो अपने कॉलेज में जाने माने जाते थे अपनी शायरी के  लिए। फिर ऐसा क्या हो गया, जो एक शायर ड्राइवर बन गया, खैर मैंने कई कविताये भी सुनी। मेरी मंजिल आ गई और मैं भैया को धन्यवाद् कह के उतर गई, रास्ता तो इतना लम्बा नहीं था लेकिन उस दिन उस आधे घंटे में मैं एक ऐसे इंसान से बात की जो बस गाड़ी चलता है क्योंकि रोटी चाहिए।जो की एक ड्राइवर है, जिसकी एक दुनियां है शब्दों की, बड़े खूबसूरती से वो उन शब्दों को सजाता है , कविताओं की माला बनाता है और अपनी हर रचना लोगों से बाटना चाहता है क्योंकि वो उसे ख़ुशी देती है।

पर वो एक ड्राइवर है.........  जो पान/गुटका खाता  है , गलियां देता  है, चिल्लाता है, जिनकी नीयत अच्छी नहीं है , जिसके साथ गाड़ी में बैठे तो ध्यान दे , गाड़ी का नंबर नोट करे, अपनों को मैसेज करे।क्या जाने वो कैसा हो... 

Saturday, April 8, 2017

अधूरा साथ ........

फिर से नई राह पर तुम्हारा अधूरा साथ लिए चल पड़ी हूँ।
इक रौशनी की तलाश में निकल पड़ी हूँ। 

नहीं जानती की ये खाब पूरा होगा कि नहीं, फिर भी 
एक धुआं गहराये हुए जल पढ़ी हूँ। 

तुमने तो कहा नहीं की वापस आओगे, मुझे अपनी दुनिया में ले जाओगे 
पर फिर भी तुम्हारा इंतज़ार कर रही हूँ 
सांसे चल रही है, पर हर घडी 
मर रही हूँ। 
तुम्हारी तलाश कर रही हूँ। 

तुम्हारे सामने भविष्य अंगड़ाई लेता होगा,
पर मेरी पलके अतीत को ही निहार रही है 
जाने क्यों हर बार कल्पना तक़दीर से हार रही है। 

तुम आ जाओ कि सांसे तुम्हे पुकार रही है 
आ जाओ की सांसे जल रही है 
तुम्हारा अधूरा साथ लिए चल पड़ी है 
तुम्हारी तलाश में निकल पड़ी है.
तुम आ जाओ........  

ना जाने क्या

दिन वही रात वही, सिर्फ जिंदगी वो नहीं है।  
तक़दीर तो नहीं बदली हमने, कैसे बदल सकते थे 
तुम्हारे होते हुये।  
खुद को इतना बदल चुके थे तुम्हारे लिए 
की कुछ और बदलने की ताकत न जुटा पाए। 
केवल सोचते रह गए 
तक़दीर चली गई सामने से
और हम ठगे से खड़े रहे 
न जाने किस सोच में 
बह गए सरे खाब 
आंसुओ में नहीं,
समय के बहाव में 
इतनी तर गई है जिंदगी की अब बिछड़ गए है 
सारे खाब जिंदगी से 
तिनका ढूंढा जो हमने सहारे के लिए 
पाया तो नहीं-----
अपनी कश्ती भी गवां बैठे गैरो के लिए  

 

अधूरे खाब

सही और गलत से परे भी कुछ हिसाब होते है ,
जो पूरे होते नहीं कभी कुछ ऐसे भी खाब होते है!

खाब ऐसे जो किसी से कभी बाटें नहीं जाते,
खाब ऐसे जो टूटे तो समेटे भी नहीं जाते !

फिर भी परछाई के जैसे हर लम्हा साथ होते है,
होते है हर किसी के ही, कुछ ऐसे इंतखाब (selection) होते है !

जो पूरे होते नहीं कभी, कुछ ऐसे भी खाब होते है,
क्योंकि सही और गलत से परे भी कुछ हिसाब होते है,
जो पूरे होते नहीं कभी, कुछ ऐसे भी खाब होते है !


Sunday, November 15, 2015

शाम

आज की शाम कुछ कुछ नई सी लगती है, आज ये जिंदगी जिंदगी सी लगती है। 
कल की शामों में जो नमी सी थी, आज वो अजनबी सी लगती है। 
जाने हर बात मुस्कुराती सी, जाने हर शै हंसी सी लगती है ,
जिंदगी जिंदगी सी लगती है , जिंदगी जिंदगी सी लगती है

जो राहें थी हमें बहाती चली, उनसे दूरी भली सी लगती है। 
कल की खुशियों में गम का आलम था, आज हर गम ख़ुशी सी लगती है। 
आज की जिंदगी जिंदगी सी लगती है , आज की शाम कुछ कुछ नई सी लगती है। 

आज पाया है कल्पना ही  को, आज हर कल्पना हक़ीक़त भरी सी लगती है। 
आज हर शै हंसी सी लगती है , ये शाम कुछ कुछ नई सी लगती है , 
जिंदगी जिंदगी सी लगती है, जिंदगी जिंदगी सी लगती है।

Friday, February 22, 2013

तलाश

एक ख्वाब की तलाश है जो सिर्फ मेरा हो।

अब तक कई ख्वाब देखे, जो हकीक़त भी बन गए ,
लेकिन वो मेरे नहीं थे

एक ख्वाब की तलाश करती हूँ
जिसकी बाँहों ने मुझे घेर घेरा हो ।

एक ख्वाब की तलाश है जो मेरा हो ।

कई नीव पड़ी सपनो की, निर्माण हुआ, कई मंजिलें चढ़ा दी
पर मेरे लिए नहीं, मेरे अपनों के लिए 

मैं तो एक ख्वाब को ढूँढती हूँ जो मेरी कल्पनाओ का सवेरा हो

एक ख्वाब की तलाश है जो बस मेरा हो ।

तारे छुप जाये चाहे , पर फिर रात ख़त्म हो, सूरज निकले,
सुबह हो उजाला हो ।

बस इसी उम्मीद पर नवजीवन की कल्पना करती हूँ
तलाश करती हूँ एक ख्वाब जो हकीक़तों का बसेरा हो

एक ख्वाब की तलाश करती हूँ, जो मेरा हो, बस मेरा हो
सिर्फ मेरा हो , एक ख्वाब तलाश करती हूँ ।